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उत्तराखंड पर बहुत सुन्दर निबन्ध 🔥🔥

उत्तराखंड पर बहुत सुन्दर निबन्ध 🔥🔥

 मेरा राज्य उत्तराखण्ड पर निबंध Essay on Uttarakhand in Hindi- 

By-Praveen Rana

बिंदास होकर आप इस पोस्ट का आनंद उठाइये।।❤️



ये हैभारत की पवित्र तपोभूमि जहा है, कैलास, गंगा, यमुना और गंगोत्री ये राज्य है. मेरा प्यारा राज्य उतराखंड जो भारत का उत्तरी राज्य है. आज हम उतराखंड राज्य के बारे में विस्तार से जानेंगे.






uttarakhand map 



उतराखण्ड भारत का उत्तरी राज्य है. जो तिब्बत, नेपाल, हिमालय तथा उत्तरप्रदेश से सीमाए बनाता है. इस प्रदेश को सबसे पवित्र स्थलों में से एक माना जाता है. ये प्रदेश भारतीय संस्कृति की अनूठी देन है.

उत्तराखंड राज्य सन 2000 से पूर्व उत्तरप्रदेश राज्य का ही भाग था. लेकिन जनता की मांग के कारण इसे एक अलग राज्य का दर्जा दिया गया. इस राज्य का गठन 9 नवंबर 2000 को किया गया था.

इस राज्य का प्रारंभिक नाम उतरांचल था. लेकिन बाद में इसका नाम बदलकर उतराखंड कर दिया गया. जिसका वर्णन ग्रंथो में मिलता है. इस प्रदेश को पहले उतराखंड के नाम से ही जानते थे. जिसका अर्थ होता है. ऊपरी भाग.

उतराखंड राज्य को सबसे श्रेष्ठ राज्य माना जाता है. इस राज्य में अनेक मंदिर है. तथा यहाँ भगवान् शिव की आस्था का सबसे बड़ा केंद्र कैलास भी यहाँ पर स्थित है. साथ ही हिमालय पर्वत भी इस राज्य में आता है.

इस राज्य में केवल मंदिर ही नहीं बल्कि यहाँ की सुन्दरता प्राकृतिक तथा व्यवहारिक लोगो को यहाँ आने के लिए प्रेरित करती है. इस राज्य से पवित्र नदिया गंगा, यमुना तथा गंगोत्री जैसी अनेक नदियों निकलती है.

इस राज्य की सुन्दरता के कारण इस राज्य के कई क्षेत्रो को राष्ट्रीय धरोहर का दर्जा दिया गया है. जो यहाँ की भव्यता को दर्शाता है. इस राज्य की अलौकिक प्रकृति की महरबानी है.

इस राज्य की राजधानी देहरादून है. जो इस राज्य का सबसे बड़ा तथा सुंदर शहर भी है. इस राज्य का कुल क्षेत्रफल 53,483 किमी² है. जिसमे 13 जिले है देहरादून इस राज्य का सबसे बड़ा जिला है.

उतराखंड में जनसँख्या लगभग 1 करोड़ है. इस राज्य के लोगो द्वारा हिंदी तथा संस्कृति भाषा को सम्मलित रूप से बोला जाता है. इसलिए यहाँ की राजकीय भाषा हिंदी तथा संस्कृत दोनो ही है.

इस राज्य की प्राकृतिक बनावट अन्य राज्यों से काफी बेहतर है. जिसका मुख्य कारण यहाँ के लोगो की पर्यावरण के प्रति चेतना है. इस प्रदेश के लोग प्राचीन समय से पेड़ पौधों की रक्षा के लिए जागरूक थे.

चिपको आन्दोलन जिसमे अनेक लोगो ने पेड़ो की रक्षा के लिए अपने प्राण गंवा दी थी. आज भी पेड़ पौधों की रक्षा यहाँ अलग ही ढंग से की जाती है.

इस राज्य को देवताओ की भूमि भी कहा जाता है. इस राज्य को पवित्र माना जाता है. इस राज्य में 85 फीसदी हिन्द लोग रहते तथा यहाँ अन्य धर्म के लोग भी रहते है.

Essay on Devbhoomi Uttarakhand in Hindi

ऊंची ऊंची पर्वत चोटियां उनमें कल कल की आवाज से बहती नदियां तथा झरने सर्पीली सड़कें देवदार के वन उनमें कलरव करते पक्षी फूलों की सुंदर मनोहर घाटियां ठंडी हवा के झोंके और गीत गाते लोग जहां प्रत्येक पर्वत चोटी मंदिर है आसमान सी उज्जवल है.

देवभूमि है ऋषि मुनियों की तपोस्थली है जहां पवित्र धाम है पवित्र नदियां हैं जिसका प्राकृतिक दृश्य देखने को मन लालायित होता है बिल्कुल आपके जहन में सही नाम आ रहा है हम बात कर रहे हैं उत्तरांचल जो वर्तमान में उत्तराखंड नाम से प्रसिद्ध भारत का पहाड़ी राज्य है जिसकी राजधानी देहरादून है.

प्राकृतिक सौंदर्य तथा अपनी विशिष्ट सांस्कृतिक पहचान को कायम रखें उत्तराखंड की भौगोलिक सांस्कृतिक विशेषताओं पर इस लेख के द्वारा चर्चा की जाएगी

उत्तराखंड का इतिहास काफी पुराना है शिला लेखों ताम्र पत्र तथा  अवशेषों से गढ़वाल की प्राचीन सभ्यता से अवगत होते हैं पुराणों तथा महाकवि कालिदास के साहित्य में यहां की सभ्यता का गुणगान हुआ है. यहां तक मौर्यकालीन ताम्रपत्र ओं में भी देवभूमि का वर्णन मिलता है.

उत्तराखंड की प्राचीन जातियों में गंधर्व नाग नाथ खस तथा यक्ष का वर्णन भी है इनके अलावा यहां पवित्र स्थानों पर भ्रमण करने के लिए संपूर्ण भारत से आने वाले लोगों ने भी निवास करना शुरू कर दिया था इस कारण प्रत्येक समुदाय के लोग यहां देखने को मिलते है.

उत्तराखंड का पहला शक्तिशाली वंश कुणिन्द वंश था इनके बाद शक तथा कुषाण शासकों ने भी यहां अधिकार किया ह्वेनसांग ने हर्षवर्धन के काल में उत्तराखंड की यात्रा की हर्षवर्धन के साम्राज्य की समाप्ति के बाद नवीन शक्तियों का उदय हुआ जिसमें प्रमुख था.

कार्तिकेय पुर राजवंश जिसने उत्तराखंड पर 300 वर्ष तक शासन किया यह उत्तराखंड का पहला ऐतिहासिक राजवंश था दक्षिण भारत के आदि पुरुष तथा अद्वैतवाद के जनक शंकराचार्य ने बद्रीनाथ व केदारनाथ मंदिरों का पुनर निर्माण करवाया.

कत्यूरी वंश कुमाऊ पर शासन करने वाला प्रमुख वंश रहा तैमूर लंग के हरिद्वार आक्रमण के समय इस वंश की समाप्ति हो गई इसके बाद नेपाल के शासक ने कत्यूरी पर आक्रमण कर उसके कुछ भाग को हथिया लिया.

कुमाऊं में चंद वंश की स्थापना सोमचंद ने की थी यह भी कत्यूरी का समकालीन था इस वंश का सर्वशक्तिशा ली शासक राजा गुरूर चंद था चंद शासकों ने गाय को राज्य पशु बनाया 1790 ईस्वी में गोरखाओं के आक्रमण के कारण  चंद वंश की समाप्ति हो गई.

परमार शासकों ने भी यहां शासन किया तो था गोरखाओ से संघर्ष किया अट्ठारह सौ चार तक आते-आते कुमाऊ तथा गढ़वाल पर नेपाली गौरखाओ ने अधिकार कर लिया था.

1814 में पहली बार अंग्रेजों ने अपनी सेना को भेजकर गढ़वाल को स्वतंत्र कराया परंतु गढ़वाल शासक युद्ध का खर्च न उठा पाने के कारण अपने राज्य को अंग्रेजों को देना पड़ा तथा टिहरी राज्य को 1 अगस्त 1949 को उत्तर प्रदेश का हिस्सा बना दिया.

गोरखा तथा अंग्रेजी शासन के दौरान उत्तराखंड में कई शहरों तथा पर्यटन स्थलों का विकास भी हुआ 1891 में उत्तराखंड से नॉन रेगुलेशन सिस्टम समाप्त किया गया.

1902 में हुए संयुक्त प्रांत आगरा व अवध के गठन के बाद उत्तराखंड को भी इसमें शामिल कर दिया गया. 1904 में उत्तराखंड को हिल स्टेशन नाम दिया गया.

उत्तराखंड का गठन दो 9 नवंबर 2000 को उत्तर प्रदेश से अलग करके किया गया यह भारत का 27 वां राज्य बना उत्तराखंड की सीमा हिमाचल प्रदेश उत्तर प्रदेश पूर्व में नेपाल और उत्तर में तिब्बत से लगती है.

पहाड़ों से घिरा हुआ उत्तराखंड की प्रमुख भाषाओं में हिंदी तथा संस्कृत है वही गढ़वाली तथा कुमायुनी भाषा भी स्थानीय भाषाओं के रूप में बोली जाती है.

उत्तराखंड का कुल भौगोलिक क्षेत्र: 51,125 किमी जिसमें से 93% पहाड़ी है और 64% वन से घिरा हुआ है उत्तराखंड हिमालय के दक्षिणी तरफ स्थित है।

उत्तराखंड के अलग-अलग शहरों की जलवायु और वनस्पति उनके स्थान की ऊंचाई के साथ  परिवर्तित हो जाती है ऊंचाई पर स्थित ग्लेशियरों में सबसे अच्छा और मनोहर मौसम रहता हैं और ये बर्फ और नंगे चट्टान से ढके होते हैं।

हालांकि कम ऊंचाई पर घने उष्णकटिबंधीय जंगल हैं। 3000-3500 मीटर के बीच पश्चिमी हिमालय अल्पाइन श्रूब और मीडोज से ढंका है। भारत की पवित्र तथा सबसे बड़ी 2 नदियां गंगा व यमुना का उद्गम इसी उत्तराखंड से होता है.

इस क्षेत्र में कई अन्य बारहमासी झीलें और कई धाराएँ भी हैं। उत्तराखंड का भूगोल इतना विविध है कि इसे भौगोलिक रूप से दो भागों में बांटा जाता है , पश्चिमी गढ़वाल और पूर्वी क्षेत्र कुमाऊं के रूप में जाना जाता है।

उत्तराखंड में भौगोलिक विविधता काफी अधिक है इसमें एक और बड़ी बड़ी पर्वत चोटियां है तो दूसरी तरफ गंगा का मैदानी क्षेत्र भी है विभिन्न प्रकार के 1 तथा मिट्टियां भी पाई जाती है जैव विविधता की दृष्टि से संपन्न राज्य है

उत्तराखंड की जलवायु विशिष्ट है तथा देश की जलवायु की तरह ही विविधता युक्त  है उत्तराखंड के उत्तरी पहाड़ी प्रदेश में वर्षा भी ज्यादा होती है तथा सर्दियों के मौसम में तापमान 0 डिग्री से भी नीचे चला जाता है.

वहीं पश्चिमी उत्तराखंड में जलवायु  शुष्क है तथा वर्षा अल्प मात्रा में होती है गर्मियों की ऋतु में यहां तथा गंगा के मैदान का तापमान 40 डिग्री सेल्सियस को भी पार कर जाता है.

उत्तराखंड की प्रमुख पर्वत चोटियों में सबसे ऊंची पर्वत चोटी नंदा देवी है इसके अलावा कामेत गंगोत्री बंदरपूछ केदारनाथ बद्रीनाथ त्रिशूल  चौखंबा अल्मोड़ा नैनीताल देहरादून इत्यादि है. इसके अलावा बहुत सारी घाटियां भी देखने को मिलती है जो पर्यटक के लिए आकर्षण का मुख्य केंद्र है.

उत्तराखंड अपने प्राकृतिक सौंदर्य के लिए जाना जाता है यहां की हरियाली फूलों की घाटियां तथा असंख्य झीलें बर्फीली चोटियां हिंदुओं के चार प्रसिद्ध तीर्थ स्थान देहरादून मंसूरी जैसे स्थान होने के साथ-साथ यहां देश का पहला राष्ट्रीय उद्यान जिम कॉर्बेट भी स्थित है इसके अलावा वैली ऑफ फ्लावर्स और नंदा देवी नेशनल पार्क देखने योग्य है.

हिल स्टेशन स्टेशन सुंदरता के कारण पर्यटक के आकर्षण का केंद्र है इसके साथ ही साथ धार्मिक तथा सांस्कृ तिक विशिष्टता के कारण उत्तराखंड अपनी एक अलग पहचान बनाए हुए हैं.

उत्तराखंड की संस्कृति में समारोह त्योहार परंपराएं रीति रिवाज संगीत नृत्य लोगों का धार्मिक सामाजिक जीवन जीवन  संपूर्ण दृष्टि से विशिष्ट राज्य हैं.

उत्तराखंड के प्रमुख पर्यटन स्थलों में अल्मोड़ा बागेश्वर चमोली चंपावत देहरादून हरिद्वार नैनीताल मंसूरी पौड़ी गढ़वाल पिथौरागढ़ रुद्रप्रयाग टिहरी गढ़वाल उत्तरकाशी प्रमुख है.





उत्तराखंड राज्य पर निबंध (250 शब्द)


उत्तराखंड राज्य अपनी पावन धरती एवं प्राकृतिक सुंदरता वाले क्षेत्रों के कारण संपूर्ण भारतवर्ष के अन्य राज्यों में अपना एक महत्वपूर्ण स्थान बनाए हुए खड़ा है। हमारे भारतीय एवं प्राचीन ग्रंथों के कथन अनुसार उत्तराखंड राज्य देवताओं की सर्वाधिक रमणीय भूमि के रूप में बहुत ही ज्यादा प्रसिद्ध है। उत्तराखंड राज्य में फूलों की घाटियां तो यहां की सुंदरता को संपूर्ण विश्व भर में विख्यात करती है। यही कारण है, कि उत्तराखंड राज्य के कुछ क्षेत्रों को विश्व की धरोहर की सूची में शामिल कर लिया गया है, जिसमें उत्तराखंड राज्य के फूलों की घाटियां मौजूद है।


उत्तराखंड राज्य में देवों के देव महादेव का निवास स्थान कैलाश और पर्वतराज हिमालय की सुंदरता के अजीत उत्तराखंड राज्य का प्रकृति के प्रति अलौकिक सौंदर्य का वरदान कहा जाता है। उत्तराखंड राज्य में बहुत सी नदियों का संगम मौजूद है। हिमालय की गोद में स्थित उत्तराखंड राज्य की भूमि बहुत ही पावन एवं पवित्र मानी जाती है। उत्तराखंड राज्य में चार प्रसिद्ध धाम भी मौजूद है, तो इसके साथ साथ महादेवी गंगा का उद्गम स्थल भी इसी राज्य में स्थित है।


उत्तराखंड राज्य अपनी पावन धरती एवं प्राकृतिक सुंदरता के कारण संपूर्ण विश्व भर में चर्चा का विषय बना रहता है और भारत के सभी विशेष राज्य में अपने एक महत्वपूर्ण भूमिका अदा करता है। उत्तराखंड राज्य में स्थित फूलों की घाटियां अपनी सुंदरता एवं प्राकृतिक दृश्य के कारण संपूर्ण विश्व भर में अपनी एक अलग पहचान बना चुकी हैं और यही कारण है, कि इन घाटियों के साथ-साथ उत्तराखंड के कुछ अन्य क्षेत्रों को विश्व की धरोहर के रूप में प्रसिद्धि प्राप्त हो गई है। उत्तराखंड राज्य के सभी निवासियों को बहुत ही खुश किस्मत माना जाता है और ऐसा भी माना जाता है, कि यहां के ज्यादातर लोग अपने लक्ष्य को प्राप्त ही कर लेते हैं।




उत्तराखंड राज्य पर निबंध (800 शब्द)

प्रस्तावना

उत्तराखंड राज्य अपनी पावन धरती एवं प्राकृतिक सुंदरता वाले क्षेत्रों के कारण संपूर्ण भारतवर्ष के अन्य राज्यों में अपना एक महत्वपूर्ण स्थान बनाए हुए खड़ा है। उत्तराखंड राज्य में फूलों की घाटियां तो यहां की सुंदरता को संपूर्ण विश्व भर में विख्यात करती है। उत्तराखंड राज्य में देवों के देव महादेव का निवास स्थान कैलाश और पर्वतराज हिमालय की सुंदरता के अजीत उत्तराखंड राज्य का प्रकृति के प्रति अलौकिक सौंदर्य का वरदान कहा जाता है।

हिमालय की गोद में स्थित उत्तराखंड राज्य की भूमि बहुत ही पावन एवं पवित्र मानी जाती है। उत्तराखंड राज्य में चार प्रसिद्ध धाम भी मौजूद है, तो इसके साथ साथ महादेवी गंगा का उद्गम स्थल भी इसी राज्य में स्थित है। उत्तराखंड राज्य अपनी पावन धरती एवं प्राकृतिक सुंदरता के कारण संपूर्ण विश्व भर में चर्चा का विषय बना रहता है और भारत के सभी विशेष राज्य में अपने एक महत्वपूर्ण भूमिका अदा करता है।

उत्तराखंड राज्य में स्थित फूलों की घाटियां अपनी सुंदरता एवं प्राकृतिक दृश्य के कारण संपूर्ण विश्व भर में अपनी एक अलग पहचान बना चुकी हैं और यही कारण है, कि इन घाटियों के साथ-साथ उत्तराखंड के कुछ अन्य क्षेत्रों को विश्व की धरोहर के रूप में प्रसिद्धि प्राप्त हो गई है। उत्तराखंड राज्य के सभी निवासियों को बहुत ही खुश किस्मत माना जाता है और ऐसा भी माना जाता है, कि यहां के ज्यादातर लोग अपने लक्ष्य को प्राप्त ही कर लेते हैं।

उत्तराखंड राज्य की प्राकृतिक सुंदरता

उत्तराखंड राज्य हिमालय श्रृंखला के दक्षिणी ढलान पर एक बहुत ही सुंदर क्षेत्र में बसा हुआ है। उत्तराखंड राज्य में मौसम और वनस्पति में ऊंचाई के साथ-साथ काफी ज्यादा परिवर्तन देखने को मिलता है। उत्तराखंड राज्य में विश्व की सर्वोच्च ऊंचाई पर स्थित यदि हिमनद स्थित है, तो इसके निचले स्थानों पर 3000 मीटर से लेकर 5000 मीटर तक घास एवं झाड़ियों से ढके मैदान स्थित है। उत्तराखंड राज्य के सबसे ऊपरी हिस्से पर बर्फ और छोटे-छोटे पेड़ पौधों से युक्त नगी चोटियां, तो इसके ठीक विपरीत निचले क्षेत्रों में विशाल उष्णकटिबंधीय वन मौजूद हैं।

उत्तराखंड राज्य की सीमा चीन और नेपाल से जुड़ी हुई है। उत्तराखंड राज्य में रहने वाले सभी लोग काफी व्यवहारिक और प्राकृतिक स्वभाव के होते हैं। भारत के इस उत्तरी राज्य में उत्तर पश्चिम की तरफ हिमालय प्रदेश और दक्षिण की दिशा में हमारा प्यारा उत्तर प्रदेश स्थित है। उत्तराखंड राज्य में बहुत से धार्मिक एवं सांस्कृतिक स्थल बनाए गए हैं। यदि आप कभी भी एक बार उत्तराखंड राज्य में चले जाएंगे, तो वहां से दोबारा वापस आने का आपको ख्याल ही नहीं आएगा।

आप सभी लोगों को उत्तराखंड राज्य में समशीतोष्ण शंकु आकार के वृक्षों से घिरे वन, व्हिच रेखा और पश्चिमी हिमालय आपको देखने को मिल जाएगा जो कि आप का मन मोह लेगा। आप सभी लोगों को उत्तराखंड राज्य से लगभग 3000 मीटर की ऊंचाई पर समशीतोष्ण पश्चिमी हिमालय एवं चौड़ी पत्तियों वाले 1 देखने को मिलेंगे। इन सभी के विपरीत आप सभी लोगों को गंगा के मैदानी वाले क्षेत्रों में नम पतझड़ वाले विशालकाय वन देखने को मिलेंगे।

उत्तराखंड राज्य में बोली जाने वाली प्रमुख भाषाएं

सामान्य रूप से आप सभी लोगों को उत्तराखंड राज्य में बोली जाने वाली मुख्य रूप से 3 भाषाएं मिलेंगे पहली गढ़वाली, दूसरी भाषा जौनसारी और तीसरी भाषा कुमाऊनी बहुत ही प्रचलित रूप से बोली जाती हैं। भारतीय लोक भाषा सर्वेक्षण के कथन अनुसार उत्तराखंड राज्य में कुल 13 भाषाएं बोली जाती हैं। उत्तराखंड राज्य में अनेकों सर्वेक्षण कार्यो ने अनेकों भाषाओं को बताया।

उत्तराखंड राज्य में सबसे पहले भाषाओं को लेकर सर्वेक्षण करने वाले जॉर्ज ग्रियर्सन ने उत्तराखंड राज्य में बोली जाने वाली भाषाओं में से ज्यादातर भाषाओं की जानकारी को प्रस्तुत किया। जॉर्ज ग्रियर्सन ने वर्ष 1908 से लेकर वर्ष 1927 तक अपना यह सर्वेक्षण कार्य जारी रखा और अपने लगभग 19 वर्ष के सर्वेक्षण में इन्होंने उत्तराखंड राज्य में बोली जाने वाली बहुत सी भाषाओं के विषय में जानकारी दी।

जॉर्ज ग्रियर्सन के बाद उत्तराखंड में बोली जाने वाली भाषाओं को लेकर अनेकों प्रकार के अध्ययन कार्य अध्ययन में जुट गए और बहुत से अध्ययन किए भी गए। अभी हाल ही में किए गए सर्वेक्षण के अनुसार पाखंडी नाम की संस्थान ने भी उत्तराखंड में बोली जाने वाली भाषाओं पर काम किया और यह कुल 13 भाषाओं पर केंद्रित भाषा रही। इन सभी भाषाओं में मुख्य रूप से जौनसारी कुमाऊनी जौनपुरी और गढ़वाली भाषा मुख्य रूप से बोली जाती है। 

अनेकों विद्वानों का यह भी मानना है, कि उत्तराखंड राज्य की भाषाओं में अपनी कोई विशेष लिपि नहीं है इतना ही नहीं यह भी कहना गलत नहीं होगा, कि संसार में सर्वाधिक प्रसिद्ध अंग्रेजी भाषा की अपनी खुद की भी कोई लिपि नहीं है। मराठी, उर्दू एवं हिंदी एक ऐसी भाषा है, जिसकी अपनी एक लिपि होती है और इन भाषाओं को भाषा माना गया है।

उत्तराखंड राज्य में स्थित कुछ प्रमुख पर्यटन स्थल

आप सभी लोगों को उत्तराखंड राज्य में बहुत से पर्यटन स्थल देखने को मिलेंगे, जिनका विवरण नीचे इस प्रकार से निम्नलिखित रुप से करने जा रहे हैं।

  1. उत्तराखंड के मुख्य चार धाम: भारतीय धर्म एवं ग्रंथों के अनुसार यमुनोत्री, गंगोत्री, बद्रीनाथ, केदारनाथ इत्यादि चार मुख्य धाम हिंदुओं के सबसे पवित्र स्थान होने के कारण पर्यटन स्थल की श्रेणी में सबसे ऊपर आते हैं। आपको यह जानकर हैरानी होगी, कि यह चारों ही धाम किसी अन्य राज्य में नहीं बल्कि उत्तराखंड राज्य में ही मौजूद है। इन चारों पवित्र स्थलों को चार धाम के नाम से प्रमुख उपाधि प्राप्त है। अक्सर लोग यमुनोत्री गंगोत्री बद्रीनाथ और केदारनाथ की यात्रा करने के लिए निकल पड़ते हैं और कुछ महीनों तक अपना जीवन यहीं पर व्यतीत करते हैं। लोगों का मानना है, कि इन चार धामों की यात्रा करके मनुष्य अपने जीवन की सभी चिंताओं एवं जीवन में किए गए पापों से मुक्त हो जाता है।
  2. उत्तराखंड राज्य में स्थित मुख्य राष्ट्रीय उद्यान: उत्तराखंड राज्य में पवित्र स्थलों के होने के साथ-साथ भारत के बहुत से राष्ट्रीय उद्यान भी इसी राज्य में मौजूद हैं। उत्तराखंड राज्य में स्थित कुछ महत्वपूर्ण राष्ट्रीय उद्यान जैसे जिम कार्बेट राष्ट्रीय उद्यान (रामनगर) फूलों की घाटी राष्ट्रीय उद्यान (नैनीताल) और गंगा की देवी राष्ट्रीय उद्यान (चमेली जिला) स्वयं की सुंदरता के कारण पूरे विश्व भर में प्रसिद्ध है।
  3. उत्तराखंड राज्य में स्थित अन्य पवित्र धाम: उत्तराखंड राज्य में विश्व भर में प्रसिद्ध चार धामों के अलावा कुछ अन्य पर्यटन स्थल भी हैं, उत्तराखंड राज्य में हरिद्वार, देवप्रयाग, यमुनोत्री, गंगोत्री, केदारनाथ, बद्रीनाथ, गौरीकुंड, रिजुगीनारायण, टिहरी, ऋषिकेश, धरासू, उत्तरकाशी इत्यादि स्वयं में अपनी एक अलग ही पहचान लिए मौजूद है।

निष्कर्ष

हम इस लेख को पढ़ने के बाद इस निष्कर्ष पर पहुंचते हैं, कि उत्तराखंड राज्य देवों की भूमि होने के साथ-साथ प्राकृतिक सुंदरता का एक प्रत्यक्ष उदाहरण है।


 


उत्तराखंड पर निबन्ध ।





प्रस्तावना

उत्तराखंड भारत देश का 27 वा राज्य है। इस राज्य का निर्माण 9 नवंबर 2000 में उत्तर प्रदेश राज्य से अलग होकर हुआ था।


इस राज्य की सीमाएं पूर्व में नेपाल और उत्तर में तिब्बत से लगी हुई है। इसी के साथ दक्षिण में उत्तर प्रदेश और पच्छिम में हिमाचल प्रदेश से इस राज्य की सीमाएं जुड़ी हुई है।


उत्तराखंड राज्य की राजधानी देहरादून है। इस राज्य में कई सारे तीर्थ स्थान और मंदिर है, जिस कारण इस राज्य को देवों की भूमि भी कहा जाता है।


इस राज्य का इतिहास और भूगोल


उत्तराखंड राज्य का पुराना नाम उत्तरांचल था। लेकिन 9 नवंबर 2000 को जब यह उत्तर प्रदेश राज्य से अलग होकर भारत देश का 27 वा राज्य बना, तब इसे उत्तराखंड नाम रख दिया गया।


लेकिन उससे पहले यह राज्य उत्तर प्रदेश राज्य काही एक हिस्सा था। उत्तराखंड राज्य ज्यादातर पहाड़ी क्षेत्र के अंतर्गत आता है, जहा पर हिमालय पर्वतमाला भी स्थित है।


गढ़वाल और कुमाऊं नामक क्षेत्र इस राज्य के दो प्रमुख हिस्से है। उत्तराखंड राज्य 13 जिलों से मिलकर बना हुआ है। इसी के साथ इस राज्य में गंगा, यमुना और ऐसे ही भारत देश की कई सारे प्रमुख नदियों का स्रोत भी हैं।



धर्म


उत्तराखंड राज्य में हिंदू धर्म का प्रभाव बहुत ज्यादा है। जिस कारण इस राज्य में बाकी धर्मों के मुकाबले में ज्यादातर हिंदू धर्म के लोग रहते है।


हालाँकि इस्लाम, सिख धर्म, बौद्ध धर्म, ईसाई धर्म जैसे अन्य धर्मों के लोग भी इस राज्य में रहते हैं। लेकिन वह हिंदू धर्म के लोगों के मुकाबले बहुत कम संख्या में है। इसी के साथ इस राज्य में रहने वाले लोगों द्वारा सबसे ज्यादा हिंदी भाषा बोली जाती है।


उत्तराखंड की अर्थव्यवस्था


भारत देश का उत्तराखंड राज्य अर्थव्यवस्था के मामले में दूसरा सबसे तेजी से विकास करने वाला राज्य है। जहा कृषि व्यवसाय इस राज्य के अर्थव्यवस्था का सबसे प्रमुख हिस्सा है।

उत्तराखंड के कृषि व्यवसाय में मिलने वाला बासमती चावल भारत देश के साथ साथ पूरे दुनिया में लोकप्रिय है। इसी के साथ यहा गेहूं, सोया, आड़ू, आलूबुखारा, सेब और संतरा जैसे उत्पादों का निर्माण भी किया जाता है।

इसी के साथ यहा के पर्यटन स्थल भी इस राज्य के अर्थव्यवस्था के प्रमुख स्त्रोतों में से एक है। क्योंकि यहा पर भारत देश की कई सारी प्राचीन संस्कृति भी मौजूद है, जिसमे केदारनाथ, बद्रीनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री जैसे कई सारे तीर्थ स्थान भी शामिल है। जिसे पूरे भारत देश के साथ साथ दुनिया के कई सारे देशों से लोग देखने को आते है।

इसके अलावा यह राज्य आइस स्केटिंग और अन्य आइस स्पोर्ट्स के लिए भी लोकप्रिय हैं। इसलिए उत्तराखंड में हर साल लाखों पर्यटक यहा घूमने के लिए आते हैं।


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